बालाजीपुरम में घट स्थापना के साथ नए साल का स्वागत

आज शनिवार से आरंभ हो रहे चैत्र नवरात्रि के अवसर पर बालाजीपुरम में भी नौ दिन तक पूजन पाठ आदि के कार्यक्रम चलेंगे।

भारत के पांचवें धाम श्री रुक्मणी बालाजी मंदिर बालाजीपुरम बैतूल में कल शनिवार को सुबह 8 बजे से शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की गई। यह पूजन कार्यक्रम सुबह 10 तक मुख्य मंदिर परिसर में होगा। इसके लिए सभी तैयारियां आज पूर्ण की गई।

पंचदेवी विराजित हैं बालाजीपुरम में

बालाजीपुरम के प्रमुख पुजारी असीम पंडा स्वामी के अनुसार पूरे परिसर में पंचदेवी विराजित हैं। इन सभी के एक साथ दर्शन का सौभाग्य सिर्फ बालाजीपुरम में ही सभी भक्तों को मिल सकता है। इनमें मुख्य मंदिर में दुर्गा देवी हैं तो मां शारदा , बंम्लेश्वरी देवी, संतोषी माता के अलावा वैष्णों देवी माता चित्रकूट धाम में विराजित हैं।
प्रसिद्धि ज्योतिषाचार्य डा घनश्याम ठाकुर के अनुसार चैत्र नवरात्र की शुरुआत आज 6 अप्रैल से हो रही है। इस दिन शनिवार और प्रतिपदा तिथि है। जो कि हिन्दू कैलेण्डर का पहला दिन है। इस साल चैत्र नवरात्र पूरे 9 दिनों के रहेंगे। चैत्र नवरात्र को वसन्त या वासंतिक नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्र के 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के  अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। इसके अलावा नवरात्र की पंचमी पर लक्ष्मी जी वहीं अष्टमी और नवमी पर मां दुर्गा और कालिका की विशेष पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि श्रीराम की जन्म तिथि होने से इस दिन भगवान राम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।

चैत्र नवरात्र मां दुर्गा की पूजा का पर्व है। इस साल नवरात्र में मां घोड़े पर सवार होकर आएंगी। ये एक शुभ संकेत है। वहीं नवरात्र में 2 शनिवार भी पड़ रहे हैं। जिसके प्रभाव से देश में खुशहाली बढ़ेगी। देश उन्नति करेगा हालांकि देश में बड़े राजनितिक और आर्थिक बदलाव होने के भी योग बन रहे हैं। चैत्र नवरात्र में पहले दिन यानी शनिवार, 6 अप्रैल को घट स्थापना की जाएगी और इस दिन शैलपुत्री के रुप में मां दुर्गा की पूजा होगी। फिर बाकी दिनों में क्रम से अन्य 8 रुपों में देवी की पूजा की जाएगी।

बालाजीपुरम संस्थापक ने दी नववर्ष की शुभकामनाएं

बालाजीपुरम संस्थापक सेम वर्मा ने सभी श्रद्धालुओं को हिन्दू नववर्ष पर शुभकामनाएं देते हुए भगवान बालाजी और पंचदेवियों के दर्शन के साथ नववर्ष आरंभ करने की अपील की है। श्री वर्मा का कहना है कि हमें गुड़ी पड़वा का यह त्यौहार पूर्ण उल्लास के साथ मनाना चाहिए, ताकि हमारी सनातन संस्कृति जीवंत रहे।

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